शनिवार, 2 अप्रैल 2011
कांग्रेस का जातीय कुचक्र
भारत की राजनीतिक बिसात में धर्म को आतंकवाद से जोड़कर जो खतरनाक खेल खेला जा रहा है वह लोकतंत्र की नींव को खोखला करता नजर आ रहा है। धर्म मानवता की रक्षा के लिए है। सुख समृद्धि की बयार लाता इंसानियत के जज्बे को समाज के सामने रखने वाले धर्म में वह सब कुछ है जो प्रकृति हमें देती है। विडम्बना है कि 125 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी अपने वोट बैंक को इसी से जोड़कर तुष्टीकरण की कूटनीति पर चलने को मजबूर होती दिख रही है। महंगाई के भीषण मुद्दे से आम आदमी का ध्यान हटाने का कुचक्र जो आज कांग्रेस रच रही है भविष्य उन्हें शायद माफ़ नहीं करेगा। 2009 के मुंबई कांड के दौरान जो कुछ घटा वह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इस आतंकवादी घटना क्रम को धर्म से जोड़ने का जो षड्यंत्र रचा गया था आज उसी लीक पर कांग्रेस चलती दिख रही है। वीकीलिक्स के साथ भारत में रह रहे अमेरिका के राजदूत ने भी ऐसी आशंका व्यक्त की थी। अमरीकी राजदूत का सन्देश गौर करने लायक है कि कांग्रेस धार्मिक राजनीति की ओर अग्रसर हो सकती है। राजदूत का इस आशय के संकेत को भारत का आम आदमी समझ नहीं सकता। वोट बैंक कहे जाने वाले आम आदमी भी कांग्रेस की इस कूटनीति को शायद कभी नहीं समझ सकेंगे मुंबई कांड के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ऐ आर अंतुले ने इसकी पहल की थी तो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक झूठा शिगूफा छोड़ा था। मुंबई कांड में शहीद करकरे की विधवा ने दिग्विजय सिंह के बयान को झूठा करार दिया है। देश के गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने हिन्दू आतंकवाद कहकर धार्मिक उन्माद को हवा देने की कोशिश की। और अब कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी ने हिन्दू आतंकवाद कह कर सभी नेताओं के झूठे बयान पर अपनी मुहर लगा दी। राहुल गांधी राजनीति के अनुभवी नहीं हैं पर दिग्गज राजनीतिज्ञ राहुल गांधी को कंधे पर बैठा कर अपनी राजनीति चलाना चाह रहे हैं। हिन्दू आतंकवाद कहना उतना ही गलत है जितना प्रकृति को अपनी मर्यादा छोड़ना। हिन्दू सनातन धर्म है जो प्रकृति के अनुकूल चलता है। दुनिया के किसी धर्म में हिंसा आतंक के लिए कोई जगह नहीं है। किसी भी आतंक, हिंसा को धर्म से जोड़ना सही नहीं है। इस तथ्य को सभी नेता जानते हैं पर आम जनता में धार्मिक उन्माद फैलाकर अपना वोट बैंक बनाने में उन्हें कोई भी मलाल नहीं है। सत्ता के शिखर पर वह जैसे भी आये फिर देश और जनता चाहे जाए भाड़ में। धर्म की आड़ में ना जाने कैसे कैसे खेल खेले जा रहे हैं। दुःख की बात है कि गुलाम भारत में अंग्रेजों ने अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए जो कुछ किया आज वही कांग्रेस करने को आमदा हो रही है। इन तमाम नसीहतों को लेकर राजनीति में कोई सुधार आयेगा इसकी कोई सूरत नजर नहीं आती मगर आम जनता को कौन समझाए जो नेताओं के इशारों पर धर्म की राजनीति खेलने के लिए जब तब बेताब होती है, और हर बार ऐसे खेल में आम -आदमी का लहू बहता है लेकिन सत्ता तक तो नेता पहुँच ही जाते हैं। बहरहाल देश में आतंकवाद की आंधी चल रही है। मंहगाई में आम -आदमी पीस रहा है। भ्रष्टाचार में नेता और मालामाल हो रहे हैं। ऐसे में आम आदमी को भटकाने के लिए हिन्दू आतंकवाद का शिगूफा काफी है। लोग लड़े चाहे मरें राजनीति को मुद्दा चाहिए जिसके दम पर कांग्रेस अपनी सत्ता पर काबिज हो सके। ( मेरे पाक्षिक अखबार "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़" के 05/01/2011 के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय )
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें