गुरुवार, 25 नवंबर 2010

शोर में गुम होते घोटाले,भ्रष्टाचार

भड़काऊ बयान के शोर तले कई घोटाले दब जाते हैं। अधिकांश घोटाले जाँच प्रक्रिया के दायरे में नहीं आ पाते। जाँच होती है तो इतना लंबा समय लगता है कि,अपराधी को बच निकलने का समय मिल जाता है। महाराष्ट्र में आदर्श सोसायटी का मामला उजागर हुआ तब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सर-संघ चालक सुदर्शन के बयान पर कांग्रेस ने पूरे देश में हंगामा मचाया, सुदर्शन के पुतले जले और शोर शराबे के बीच मामला ठंडा पड़ गया।
आदर्श सोसायटी में फ्लेट निर्माण कर कारगिल के शहीद परिवारों को बसाना था,जो नहीं हो सका। सारे नियम क़ानून को ठेंगा बताकर ३१ मंजिला इमारत खड़ी कर दी गयी। आदर्श सोसायटी में जन प्रतिनिधि बने नेता, बड़े पदों पर बैठे हमारे नौकरशाह और सेना के वरिष्टतम अधिकारियों ने आदर्श सोसायटी पर फ्लैट ले लिया। मुख्यमंत्री बदल गया पर नए मुख्यमंत्री में इतनी ताकत नहीं है कि राजनीतिक,नौकरशाहों और सेना अधिकारियों से फ्लैट वापस ले लें। कारगिल के शहीद परिवारों का हक़ छीनने पर कांग्रेस ने कोई बवाल नहीं मचाया। उन्हें तो सुदर्शन के बयान पर आन्दोलन करना जरुरी था।
भ्रष्टाचार और घोटाले की राजनीति में आम आदमी पिस रहा है। महंगाई की चक्की में पिसते आम जन को कोई राहत नहीं मिल रही है। राष्ट्र मंडल खेलों में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ मगर अब तक कोई पकड़ में नहीं आ सका। ऐसा लगता है कि देश की क़ानून व्यवस्था आम आदमी के लिए ही बनी है जिसमें ज़रा सी गलती की और क़ानून के शिकंजे में वह आ गया। हमारी अदालतों में अधिकांश प्रकरण ऐसे ही हैं। बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार करने वाले अपने पद, प्रभाव से सब कुछ निपटा लेते हैं। पूर्व पुलिस महानिरीक्षक राठोर पर १८ साल बाद क़ानून का फंदा पडा तो क्या हुआ? देश की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी सी.बी.आई. ने राठोर को क्लीनचिट दे दी। अब सी.बी.आई.के खिलाफ कौन बोलेगा, वह सर्वशक्तिमान जो ठहरी। सी बी आई की कार्यप्रणाली पर जब तब उंगली उठती रही है मगर अब तक उसका रवैया नहीं बदला। २ जी स्पैक्ट्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछताछ की है। केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार चुप्पी साधे बैठी है। घोटाला तो हुआ है पर इसका दोषी कौन है, हर बार की तरह जाँच आयोग बैठा दिया जाएगा और मामला ठंडा पड़ जाएगा।
नक्सलवाद समस्या देश के लिए नासूर बन गयी है। तथाकथित नक्सली अब माफिया गिरोह बन गया है जो भ्रष्टाचारियों से चौथ वसूली कर रहे हैं। नक्सली आम आदमी का जीना हराम कर रहे हैं। यात्री ट्रेनों में विस्फोट,विद्ध्युत आपूर्ती में बाधा और विकास के कार्यों पर रोक लगाना नक्सलियों का मुख्य कार्य बन गया है। मई २०१० में यात्री ट्रेन में विस्फोट के बाद रेलवे सरकार नक्सलियों के आगे नतमस्तक हो गयी है। पश्चिम बंगाल में यात्री ट्रेनें रात में चलना बंद हो गयी हैं। रेलवे का यह निर्णय नक्सलियों के वजूद को और बढ़ाना ही दिख पड़ता है। खैर बंगाल में चुनाव के बाद ही यह तय होगा कि किसमें है दम।
सत्ता पाने के लिए राजनीतिक दांव पेंच और सत्ता में रह कर भ्रष्टाचार और घोटाले कर धन बटोरना आज मुख्य ध्येय बन गया है। हर जगह लूट का बोलबाला हो गया है। ऐसा कोई कानून नहीं दिख रहा है जो भ्रष्टाचार और घोटालों पर नकेल लगा सके। भड़काऊ बयान के बाद आन्दोलन से सार्वजनिक संपत्ति को जो नुकसान होता है उसकी भरपाई कौन करेगा? इन सबके लिए क़ानून बनाना अब जरूरी हो गया है।
( मेरे पाक्षिक अखबार "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़" के २०/११/२०१० के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय)

रविवार, 14 नवंबर 2010

मुन्नी नहीं छत्तीसगढ़ बदनाम हुआ

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच से मुन्नी बदनाम हुई। दर्शकों पर पुलिस की लाठी बरसी। सारा नज़ारा कुछ अटपटा सा लगा। ऐसा लगा कि हम बिहार पहुँच गए जहां अक्सर ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। सारा उत्सव सलमान खान के आने और जाने में ही सिमट गया। सरकारी मंच से आइटम सांग के ठुमके लगे जिसने भीड़ का सैलाब बहा दिया,मगर कुछ अच्छा नहीं लगा। न मालूम सरकार के किस नुमाइंदे का यह किया धरा है कि राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ बदनाम हुआ। सरकार को बदनाम करने की कोई साजिश है इस बात से इन्कार भी नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़ निर्माण के दस साल में राज्य ने बेहतर प्रगति की है। रमन सिंह अपनी लोक कल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करते हुए देश के मुख्यमंत्रियों को सन्देश भी दे रहे हैं। देश में छत्तीसगढ़ की प्रगति अव्वल नंबर पर पहुंच गयी है। खुशहाल राज्य बनते छत्तीसगढ़ के जन-जन के चेहरे में रौनक झलकने लगी है। छत्तीसगढ़ अपनी उपलब्धियों के लिए एक मिसाल बन गया है। अफसोस है कि राज्योत्सव में एक मिसाल कायम होती जो नहीं हो सकी।
राज्योत्सव की परंपरा में स्थानीय सहित देश के चुनिन्दा व्यक्तित्व की शिरकत होती रही है। हर बार का उत्सव एक सन्देश देता है। छत्तीसगढ़ की लोक कला, परम्परा, उससे जुड़े लोगों को बड़ी आशा होती है कि उन्हें हर कोई देखे। इस बार ऐसा कुछ देखने का उत्साह ही काफूर हो गया क्योंकि उन पर पुलिस का डंडा कहर बरपा गया।
सरकार का मंच किसी कम्पनी के रहमोकरम का मोहताज नहीं है, खासकर छत्तीसगढ़ जैसा समृद्ध राज्य तो हो ही नहीं सकता। सलमान खान और टीवी कंपनी का नाम हर आदमी की जुबान पर चढ़ गया। अफवाहों के पंख पांव पसारते हैं, जहाँ राज्योत्सव का खर्चा टी वी कंपनी अपने जिम्मे ले रही है। ऐसी आम चर्चा का बाजार गर्म है।
छत्तीसगढ़ की जनता में सरकार की छबि और उनकी सोच में एक दुहराव सा आ गया है। राज्योत्सव की शुरुआत ने भीड़ तो बटोर ली पर उनके दिलों पर चोट भी कर दी। सलमान खान और आइटम गर्ल को हर कोई देखना पसंद करता है,पर राज्य के मंच में उनके सम्मान के लिए पलक-पांवड़े बिछा देना,कुछ अच्छा नहीं लगा।
राज्य बनने के एक दशक होने पर कोई यादगार प्रस्तुति होती,सरकार आम आदमी को उत्सव संस्कृति से जोडती, जो नहीं हो सका। फ़िल्मी कलाकार समाज से अलग नहीं हैं पर उन कलाकारों को मंच देना जो फूहड़ अश्लीलता परोसते हैं, उचित नहीं है। सलमान खान जिनके ऊपर कृष्ण मृग को मारने का
आरोप राजस्थान में लगा और दूसरे प्रकरण भी हैं। सामाजिक मर्यादा का पालन नहीं करने वाले कलाकार को छत्तीसगढ़ में अभिनंदित करना गरिमा के अनुकूल नहीं है।
राज्योत्सव में जो हो गया वह नहीं होना था। राज्योत्सव से जो आशा लगी थी वह धूमिल पड़ गयी। राज्य की एक अच्छी सरकार जो अपनी कल्याणकारी योजनाओं को मूर्त रूप दे रही है वह ऐसा कुछ करे कि उसके खिलाफ बोलने के लिए मन मजबूर हो जाये, इसके लिए किसे दोष दिया जाए यह ठीक-ठीक समझ नहीं आता। बहरहाल बदनामी का ठीकरा तो छत्तीसगढ़ में फूट ही गया। राज्योत्सव की नाकामयाबी को ढकने के लिए सरकार को पहल करनी होगी। मुख्यमंत्री रमन सिंह को एक पहल करनी होगी ताकि उनके बढ़ते कदम में वही गति और लय रहे जो अब तक विद्यमान है।
(मेरे पाक्षिक अखबार "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़" के ५ नवम्बर २०१० के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय )