गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

कला धन में जनता व सरकार

विदेशों में जमा भारत के काला धन पर प्रधानमंत्री मनमोहन की नकारात्मक टिप्पणी ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जर्मन बैंक में जमा काला धन के खाताधारकों के नाम की सूची सरकार के पास आ चुकी है। जर्मन सरकार ने यह सूची भारत को सौंपी है। विकीलिक्स स्विट्जर लैंड की बैंक में भारतीय खाताधारियों के नाम उजागर करने जा रहा है। ऐसे में क्या गोपनीयता भंग नहीं होगी। गांधी परिवार के खाते स्विस बैंक में होने की पुष्टि हो गई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेशों में जमा काला धन खाताधारियों को इसलिए बचाने में लगे हैं कि गांधी परिवार के खाते सार्वजनिक न हों। विदेशों में काला धन जमा करने वाले भ्रष्ट राजनीतिज्ञ हैं तो घोटाले और भ्रटाचार में लिप्त उच्च अधिकारी भी हैं,जिन्होंने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए देश में घोटाले किये और देश की जनता तक पहुँचने वाली विकास, सहयोग की धन राशि पर खुलेआम डाका डाला है। घोटालेबाज राजनीतिज्ञ को भ्रष्ट अधिकारी बचा रहे हैं तो ऐसे अधिकारियों को नेता शह दे रहे हैं। काला धन जमा करने वालों के लिए केंद्र सरकार जिस तरह बचाव की मुद्रा में आगे आई है, उससे सरकार पर आम जनता का विश्वास कम होता नजर आ रहा है। बोफोर्स कांड में दलाली ली गई है जिनके नाम अब जनता के सामने आ चुके हैं। सरकार इस पर क्या कदम उठाने वाली है यह देखना बाकी है। विदेशी बैंकों में जमा काला धन के खाताधारक कौन हैं उनके नाम उजागर नहीं हो सकते तो वह काला धन सरकार भारत वापस लायेगी? यह प्रश्न संदेह के घेरे में है? लोक सभा चुनाव में यह मुद्दा उठा था तब से अब तक ऐसे खाता धारक अपना धन दूसरी जगह ले जा चुके होंगे क्योंकि उन्हें पर्याप्त समय मिल चुका है। ऐसे में क्या भारत सरकार उन सभी खाता धारक की सूची लेगी जिनके बैंक खातों में धन राशि जमा थी। सवाल बहुत हैं और सरकार का बचाव भी भरपूर है। भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, अधिकारियों का काला धन वापस लाना बहुत टेढ़ी खीर है। देश की संसद में ऐसे खाताधारक बैठे हैं। शासन प्रशासन की बागडोर थामे भ्रष्ट अधिकारी भी नहीं चाहते ऐसे में केवल जनता के चाहने, नहीं चाहने से कुछ नहीं हो सकता। खरबों रुपया का काला धन देश की तकदीर बदल सकता है, तो उन राजनीतिज्ञों, अधिकारियों को बेनकाब भी करेगा जिन्होंने देश एवं जनता को धोका दिया है। अगर काला धन जमा करने वालों का नाम उजागर होगा तो सचमुच देश में एक भूचाल उमड़ पडेगा। अगर ऐसे भूचाल के डर से देशद्रोहियों का बचाव सरकार करेगी तो क्या यह न्याय संगत बात होगी? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भारत की तकदीर बदल सकते हैं। जिनकी अब तक की साफ़ सुथरी तस्वीर है। विदेशों में जमा काला धन को लाने की पहल प्रधानमंत्री अगर अभी नहीं करेंगे तो उनकी छवि दागदार हो जायेगी। देश में बढ रही मंहगाई, दिन पर दिन हो रहे घोटाले और पुराने घोटालों के अपराधियों के नाम जिस तरह सामने आ रहे हैं, उन पर केंद्र सरकार की नकारात्मक कार्यवाही से आम-आदमी हतप्रभ है। आखिर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के सामने क्या मजबूरी है कि वे सत्य को सत्य बोलने में कतरा रहे हैं? बहरहाल देश में जो कुछ चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। सत्य का पर्दाफाश देर-सबेर तो होने वाला है। मगर अधिकार संपन्न प्रधानमंत्री मनमोहन की चुप्पी को देश की जनता नहीं भूलेगी। जिनके हाथ में अधिकार है समय उन्हें परखेगा। अपराधी कौन है यह तथ्य जब उजागर होगा तो इतिहास कभी उन्हें माफ़ नहीं करेगा। जो देश की भूखी जनता को निवाला दिला सकता है उसे किसने और क्यों छिना समय ही पूरी दुनिया में सत्य को उजागर करेगा। ( मेरे पाक्षिक अखबार "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़" के 20/01/2011 के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय)

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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  2. भ्रष्टों की सरकार है साहब। नाम उजागर हुए तो जनता खूब मारेगी। कहीं छुपने को जगह नहीं मिलेगी। इसलिए नाम छुपा रहे हैं।

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  3. खरबों रुपया का काला धन देश की तकदीर बदल सकता है, तो उन राजनीतिज्ञों, अधिकारियों को बेनकाब भी करेगा जिन्होंने देश एवं जनता को धोका दिया है।

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