शनिवार, 24 जुलाई 2010

क्या शहीद चंद्रशेखर आज़ाद को हम भुला देंगे ?

शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म २३ जुलाई १९०६ को म.प्र.के झाबुआ जिले के भावरा गाँव में पंडित सीताराम तिवारी के घर हुआ था। उनकी माँ का नाम जगरानी देवी था।
कल २३ जुलाई को मन में यह भाव उठा कि,आज उस महान शहीद की कोई प्रतिमा इस छत्तीसगढ़ की राजधानी में ढूँढें और उस पर माल्यार्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाये तथा अपने अखब़ार 'क्रांतिरथ छत्तीसगढ़ 'में यह जानकारी छापी जाए । राज़धानी में एक चंद्रशेखर आज़ाद वार्ड है तथा एक आज़ाद चौक भी है यह हमें मालूम था। मैं 'क्रांतिरथ छत्तीसगढ़' में अपनी सहयोगी अर्चना हुखरे के साथ शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की मूर्ति की तलाश में निकल पड़ा। मठ पुरेना क्षेत्र जो वर्तमान में चंद्रशेखर आज़ाद वार्ड के नाम से जाना जाता है। स्वाभाविक रूप से वहां शहीद आज़ाद की मूर्ति होगी,यह विचार मन में आया,हम वहां गए और पता भी लगाया पर वहां कोई भी मूर्ति नहीं मिली।
फिर हम आज़ाद चौक गए तो सबसे बड़ा आश्चर्य ये हुआ कि,आज़ाद चौक के नाम से जो चौक है,वहां प्रतिमा गाँधी जी की लगी हुई है। कुछ पुराने जानकारों से एवं अन्य विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि,गाँधी जी की मूर्ति वाले इस चौक का आज़ाद चौक नाम १४ वर्षीय बलीराम आजाद की स्मृति में रखा गया था। बलीराम आजाद ने स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान वानर सेना बनाई थी।बलीराम जी के बारे में और कोई ज्यादा जानकारी तत्क्षण नहीं मिल पाई और यह हमारा कल का विषय भी नहीं था।
आज़ाद चौक पर लगी गाँधी जी की मूर्ति को बनवाने का श्रेय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमलनारायण शर्मा को जाता है। उन दिनों पंडित रविशंकर शुक्ल मुख्यमंत्री थे। प्रशासन मुख्यमंत्री शुक्ल से उद्धघाटन कराना चाहता था किन्तु कमलनारायण शर्मा इसके लिए तैयार नहीं हुए।
उन दिनों राष्ट्रपति डा.राजेन्द्रप्रसाद रायपुर आने वाले थे।श्री शर्मा डा.राजेन्द्रप्रसाद के कर कमलों से मूर्ति का उद्धघाटन कराना चाहते थे। मुख्यमंत्री शुक्ल प्रतिमा को देखने आये। सरकार और राष्ट्रपति को खबर दी गई कि,मूर्ति गाँधी जी जैसी नहीं दिखती है। इससे विवाद निर्मित हो गया।
१४ सितम्बर १९५६ को महामहिम राष्ट्रपति जी आने वाले थे,इसके पूर्व १३ सितम्बर की शाम को कमलनारायण शर्मा और रामसहाय तिवारी ने एक हरिजन की बेटी से प्रतिमा का
उद्धघाटन करा दिया। बाद में इस हरिजन बेटी ने महामहिम को माला भी पहनाई थी।
ये तो हुई गाँधी प्रतिमा वाले आज़ाद चौक की कहानी।
हमें बहुत दुःख और गुस्सा भी आया कि,रायपुर में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की एक भी प्रतिमा नहीं लगी है।
हमने चंद्रशेखर आज़ाद के चित्र पर माल्यार्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मेरी उन साथियों से आग्रह है जो ये मानते हैं कि,भारत को आज़ादी दिलाने में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का भी अतुलनीय योगदान है,तो अपने अपने स्तर पर उन्हें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहीद आज़ाद की स्मृति में बनाये गए वार्ड में उनकी भव्य प्रतिमा लगवाकर उनकी आने वाली पुण्य तिथि २७ फ़रवरी को उद्धघाटन करवाने का प्रयास करना चाहिए।
नारायण भूषणिया

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