फिर से छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर भारतमाता के सपूतों को इस देश के ही कपूतों ने मौत की नींद सुला दिया। 27 नौजवान शहीद हो गए और 15 घायल।
क्या हो गया इस देश को? राष्ट्र की सीमाओं पर विदेशियों से अपने देश की रक्षा करते हुए जितने लाल शहीद नहीं हुए होंगे, उससे अधिक अपनी ही धरती पर अपने ही भटके हुए भाइयों के द्वारा मारे गए।
नक्सलवाद के नाम पर चल रहे आतंकवाद को नेस्तनाबूत करने के लिए कब जागेगी केंद्र सरकार?जो सरकार अपने देश के भीतर घुसे देशद्रोहियों को समाप्त करने में असफल हो रही है वो सरकार विदेशियों से कैसे देश की सीमाओं की रक्षा कर सकेगी ?
आखिर केंद्र सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है जो नक्सली हमले से निपटने में नाकाम होने का सारा दोष राज्य सरकारों पर मढ़कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है।
आखिर क्यों ? नक्सली आतंकवाद के खिलाफ सेना का इस्तमाल करने के मामले में केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में मतभेद उजागर होते हैं? पशुपति से तिरुपति तक के कारीडोर में सशक्त हुए माओवादियों के पोषक तत्व कहीं केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में तो नहीं बैठे हैं ?
110 करोड़ की जनसँख्या वाले देश में क्या कोई लोहपुरुष नहीं है जो इस राष्ट्र का नेतृत्व कर इन समस्याओं से देश की जनता को उबारे ?
कुछ लोगों का कहना है कि नक्सलवाद के पीछे चीन का हाथ है। अगर यह सही है तो कभी क्या ऐसा नहीं हो सकता कि,चीन 1962 की तरह हमारी सीमाओं पर आक्रमण करे और सेना देश की रक्षा के लिए उनसे लड़े और उसी समय भारत के 12 राज्यों में फैले माओवादियों बनाम नक्सलवादियों बनाम आतंकवादियों द्वारा कहीं देश के भीतर तथाकथित क्रांति शुरू कर दी गई तब क्या होगा ?
क्या हम उस समय भी सेना का इस्तमाल नहीं करेंगे? क्या नक्सलवादियों की यह लड़ाई किसी युद्ध से कम है ? यदि इसे हम युद्ध की तरह नहीं लेंगे तो ऐसा न हो कि इस धरती से कहीं कोई और देश का उदय हो जाये ?और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का धर्म निभाने वाले मंत्री,नेता तथा मोमबत्ती जलाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करके फोटो छपाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी देखते रह जायेंगे।
देश की 80 प्रतिशत जनता इस लड़ाई के कारण को समझ ही नहीं पा रही है और आये दिन समाचारपत्रों में आई खबरों को पढ़कर आकाश की ओर भगवान को ताकते हुए पूछती है ये आखिर क्यों...?
chhota-sa magar suvicharit lekh. in panktiyon ke sath, ki
जवाब देंहटाएंtumane haath barhayaa hai toh,
mai bhi hath barhaoonga.
isi tarah se manvataa ka,
sundar farz nibhaoonga.