रविवार, 27 जून 2010

छत्तीसगढ़ याने अमीरगढ़

पिछले कुछ दिनों से छतीसगढ़ अमीरों का गढ़ बन गया है। कभी आयकर विभाग के छापे कभी सी.बी.आई. के। हर छापों में हजारों लाखों की अघोषित आय नहीं करोडो का गोलमाल है। अब इस अमीर धरती ने गरीब नहीं अमीरों को जन्म देना प्रारंभ कर दिया है। भारत के कोने कोने से लोग छत्तीसगढ़ की तरफ भागे चले आ रहे हैं। यहाँ के निवासी भी अपनी जमीनों के मुहं मांगे दाम मिलने से फीलगुड में हैं। सभी वर्त्तमान में जी रहे हैं ,किसी को भविष्य की चिन्ता ही नहीं है।
किसी समय राजनीति सेवा का माध्यम हुवा करती थी , आज इसके मानें बदल गए हैं। सेवा का मूलमंत्र अब मेवा प्राप्ति का एक तंत्र बन गया है। भ्रष्टाचार नस नस में समा गया है ,तथा लोगों में बड़ी बेदर्दी से धन प्राप्त करने की हवस बढ़ी है,यह कहाँ जाकर रुकेगी भगवान जानें। समाज में हो रही किसी गलत हरकत पर आलोचना करने से आलोचक को नकारात्मक सोच वाला करार दिया जाता है। किसी की गलतियों पर परदा डालने वाला या मौन रहने वाला व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला "possitive
thinker" कहलाता है।
वर्तमान सामाजिक परिवेश में मुझे तो यही कहना है :-
कल को, जो चला गया याद कर रहा हूँ ,
कल को, जो आने वाला है इंतजार कर रहा हूँ ,
आज जो सन्मुख है भुगत रहा हूँ !
जनता का है वरदान , मेरा भारत महान .......

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