उड़ीसा के राजा खरियार से पलायन करके आये सामान्य मध्यम परिवार के सदस्य बाबूलाल छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल में जहाँ भी रहे सुर्ख़ियों में रहे.इनके मातहत अधिकारी,कर्मचारी या पीड़ित व्यापारी वे चाहे राजनांदगाँव,दुर्ग जिले के या अन्य कहीं के हों, जब इनके यहाँ सी.बी.आई. तथा आयकर विभाग के छापे के बाद प्राप्त बेनामी संपत्ति के कारण राज्य सरकार द्वारा इन्हें निलम्बित किया गया तो बहुत से लोगों के मन में यह विचार थे कि, अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे....
पूर्व कृषि सचिव,जब स्वास्थ्य सचिव थे तब उनके द्वारा एक कांग्रेसी नेता के अधिकारी पुत्र के साथ मिलकर किये गए स्वास्थ्य घोटाले की श्याही अभी सूख भी नहीं पाई थी कि ये छापे की कार्यवाही हो गयी बाबूलाल पर .
ईमानदार वह है जिसे बेईमानी करने का मौका नहीं मिला इस वाक्य को अपने जीवन का उद्देश्य बनाने इस अधिकारी ने इसे जहाँ मौका मिला खूब भ्रष्टाचार किया तथा ईमानदारी के मुहं पर तमाचा मारा .
फिर भी देर आया दुरुस्त आया की तर्ज पर राज्य सरकार ने इस अधिकारी को निलंबित कर दिया .जब इस अधिकारी के यहाँ छापा पड़ा तब पास के गाँव के गरीब २२० कृषको के बैंक खातों की जानकारी सारे देश को मिली थी जिसका संचालन इस अधिकारी के परिवार वाले कर रहे थे. एक पढ़ा लिखा मेधावी युवक अपनी प्रतिभा का उपयोग किस प्रकार गलत दिशा में करता है इसका जीता जागता सबूत है बाबूलाल अग्रवाल .
सैकड़ो करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति रखने वाले इस अधिकारी को विलम्ब से निलम्बित किया गया, इसकी जड़ें इतनी मजबूत हैं इस बात से प्रमाणित होता है कि इसे बहाल करने में सरकार ने कोई देरी नहीं की.
नियमानुसार निलम्बन के ९० दिनों के भीतर राज्य शासन द्वारा इस अधिकारी को आरोप पत्र तथा आरोप विवरण देना था, परन्तु इस भ्रष्ट अधिकारी के पोषक तत्वों ने यह नहीं होने दिया तथा बी.एल.अग्रवाल को बहाल कर राजस्व मंडल बिलासपुर का सदस्य बनाकर अति -महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया. भ्रष्टाचार को बढावा देने वाले इस निर्णय ने राज्य सरकार को भी संदेह के घेरे में ला दिया है और लोग यही गुनगुना रहे हैं... वाह रे बाबूलाल तूने कर दिया कमाल...
छत्तीसगढ़ ब्लॉगर्स चौपाल में आपका स्वागत है.
जवाब देंहटाएंआरंभ
गुरतुर गोठ